Sunday, June 16, 2024

वो मुर्शरफ का झुक कर मिलना दिलीप साहब से

वह दिन था 15 जुलाई 2001। राजधानी में उस दिन लगातार कभी तेज तो कभी धीमी रफ्तार से बारिश हो रही थी। मानसून का असर दिखाई दे रहा था। दिल्ली शाम ढलते ही घरों की तरफ बढ़ रही थी। तब तक मेट्रो रेल ने दिल्ली में दस्तक नहीं दी थी। उधर, राष्ट्रपति भवन में देश की सियासी, बिजनेस और बॉलीवुड की खासमखास शख्सियतें पहुंच रही थीं। उस रोज पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के सम्मान में भोज की मेजबानी भारत के राष्ट्रपति के.आर.नारायणन कर रहे थे। एक उम्मीद थी कि मुशर्रफ की यात्रा से दोनों पड़ोसियों के रिश्तों में मिठास घुलने लगेगी।

आज परवेज मुशर्रफ अपनी बुझती सेहत को लेकर सुर्ख़ियों में हैं  तो उस दिन की भी यादें कुछ लोगो के जेहन में ताजा हो गईं।

 राष्ट्रपति जी के भोज में  प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उनकी कैबिनेट के सदस्यों के अलावा देश की अति विशिष्ट शख्सियतें मौजूद थीं हीं। उनमें बॉलीवुड के महान कलाकार दिलीप कुमार भी थे। वे सपत्नीक सायरा बानो के साथ वहां पर मौजूद थे। दिलीप साहब ने शानदार फॉर्मल सूट पहना हुआ था और सायरा बानो ने बनारसी साड़ी।

 परम्परा के मुताबिक, भोज के बाद परवेज मुशर्रफ से तमाम मेहमान मिल रहे थे। जब दिलीप कुमार और सायरा बानो का नंबर आया परवेज मुशर्रफ से मिलने का, तो नजारा वास्तव में बिल्कुल अलग था। सैनिक तानाशाह और कारगिल की जंग का आर्किटेक्ट परवेज मुशर्रफ जिस कातर भाव से दिलीप कुमार से मिला वह मंजर जिसने भी देखा, उसे यकीन नहीं हुआ। मुशर्रफ अपने दोनों हाथों को बांधे हुए दिलीप साहब से करीब-करीब झुक कर मिले। उनके चेहरे के भावों को पढ़कर समझ आ रहा था कि मानो वे अपने नायक से मिल कर अभिभूत हों। उनके चेहरे पर सैनिक वाली अक़ड़ या अक्खड़पन कहीं नजर नहीं आ रहा था। जैसी स्थिति उनकी थी, उससे मिलती-जुलती स्थिति उनकी पत्नी की भी थी। वे भी दिलीप कुमार साहब को मिल और देखकर अपने को भाग्यशाली मान रही थी। दोनों जोड़ों में करीब तीन-चार मिनट तक बात हुई। इनमें क्या बात हुई ?

 जाहिर है, ये तो किसी को नहीं पता चला। पर अगले दिन दिलीप कुमार साहब से मिलने कुछ पत्रकार राजधानी के तिलक मार्ग पर स्थित सागर अपार्टमेंट्स पहुंच गए। वहां पर उनके परम मित्र सागर सूरी का घर था। दिलीप साहब वहां पर ही ठहरे थे। जब सागर अपार्टमेंट्स बना था तब दिलीप कुमार ने भी यहां पर फ्लैट लिया था। दिलीप साहब और सागर सूरी में घनिष्ठ संबंध थे। पत्रकार सागर सूरी की मार्फत दिल्ली साहब से मिलकर जानना चाहते थे कि मुशर्रफ और उनके दरम्यान क्या बात हुई?

 दिलीप साहब को उसी दिन  शाम को मुंबई के लिए रवाना होना था। लेकिन सागर अपार्टमेंट्स में उनके दोस्तों का तांता लगा हुआ था। बहरहाल,वे हम लोगों से मिलने के लिए आए। पंजाबी में सागर सूरी ने उन्हें कहा कि दिलीप साहब, तूस्सी पंज-सत मिनट गल कर लो एना दे नाल। ए मुंडे वेट करदे पए ने त्वाडा। ( दिलीप साहब, आप इनसे पांच-सात मिनट बात कर लो। ये आपका इंतजार कर रहे हैं)। दिलीप कुमार ने सिर हिलाते हुए जवाब दिया- ए ते छोटी जई गल हैगी। ( ये तो छोटी सी बात है)। अब दिलीप कुमार हमारे सामने थे। ड्राइंग रूम में बात हो रही थी। वहां से पाकिस्तान के दिल्ली में उच्चायुक्त के निवास का कुछ भाग दिखाई दे रहा था।

 अत्यंत आकर्षक लगे रहे दिलीप साहब मुस्कान बिखेरते हुए पूछने लगे-  क्या जानना चाहते हैं? इससे पहले कि कोई जवाब देता, वे बताने लगे कि “ मुशर्रफ साहब और उनकी बेगम को हमारी कई फिल्में याद हैं। मुशर्रफ साहब को मुगलेआजममधुमती और देवदास खासतौर पर पसंद है। उनकी बेगम को राम और श्याम, शक्ति और दीदार। हम सबने बहुत दोस्ताना माहौल में बात की। मुशर्रफ साहब कह रहे थे कि आप तो मेरे हीरो हैं। ” फिर वे कहने लगे – “ ठीक है। अब इजाजत दें।” बता दें कि सागर सूरी के छोटे भाई ललित सूरी भारत के होटल सेक्टर के बड़ा नामा थे। उन्होंने देश के कई हिस्सों में होटल खोले। दिल्ली के उनक होटल को ललित होटल कहा जाता है। 

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