Thursday, February 29, 2024

सलमान रूश्दी की दिल्ली चाहत : क्या ये सपना अधूरा ही रह जाएगा?

सलमान रूश्दी पर जानलेवा हमले से दुनिया स्तब्ध है! वह भले ही दिल्ली ना पाते  हो, पर वह अपने पिता के यहां के घर को लेना चाहते हैं! उस घर को लेने के लिए वे हर चंद कोशिश कर हैं. 

सिविल लाइंस मेट्रो स्टेशन से कुछ ही दूर है  फ्लैग स्टाफ रोड। घने पेड़ों की हरियाली से लबरेज फ्लैग स्टाफ रोड  के बंगले कई-कई एकड़ में फैले हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का सरकारी आवास भी यहां ही हैं। पर इधर का 4 नंबर का बंगला अपने आप में खास है। यह बंगला  उपन्यासकार सलमान रुश्दी के पिता अनीस अहमद का रहा है। वे दिल्ली के मशहूर वकील थे। वे दीवानी के मामलों में जिरह करना पसंद करते थे। उन्होंने इसे 1946 में खरीदा था। वे पहले सपरिवार बल्लीमरान में ही रहते थे। पैसा आया तो उन्होंने एक सुंदर बंगला खरीद लिया। वे एंग्लो एराबिक स्कूल के मैनेजमेंट से भी जुड़े हुए थे। 

हमेशा वेल ड्रेस रहने वाले अनीस अहमद दिन भर की मारामारी के बाद  शामें कनॉट प्लेस के मरीना होटल में ही गुजारना पसंद करते थे । पर वे 1960 के दशक में लंदन चले गए। वे देश के बंटवारे के समय भी  पाकिस्तान नहीं गए थे। लंदन से कभी-कभार ही दिल्ली आते। वे 1970 में दिल्ली आए। यहां उनका कुनबा और तमाम दोस्त थे ही।  तब उन्होंने राजपुर रोड के एक प्रॉपर्टी डीलर लज्जा राम कपूर की मध्यस्थता से अपना बंगला स्वाधीनता सेनानी और कारोबारी भीखूराम जैन  को 300 रुपए मासिक रेंट पर दे दिया। भीखू राम जैन 49 राजपुर रोड में रहते थे। उनका परिवार बढ़ रहा था। इसलिए उन्होंने 4 फ्लैग स्टाफ रोड के बंगले को तुरंत किराए पर ले लिया ताकि परिवार के कुछ मेंबर वहां पर शिफ्ट कर लें। पर इस डील के चंदेक दिनों के बाद अनीस अहमद फिर से भीखूराम जैन से मिले। उनके साथ लज्जा राम कपूर भी थे। उन्होंने जैन से अपने बंगले को खरीदने की पेशकश की।

 1980 में चांदनी चौक से लोकसभा के लिए चुने गए भीखूऱाम जैन  अनीस अहमद के बंगले को खरीदने के लिए  राजी हो गए। तय हुआ कि वे 3. 75 लाख रुपए में बंगला खरीद लेंगें। उन्होंने 50 हजार रुपए बयाना अनीस अहमद को दे दिया। शेष रकम 15 महीने में दी जानी थी। अनीस अहमद बयाना लेकर एक बार जो लंदन गए तो वे फिर कभी नहीं लौटे। वहां पर ही उनकी  मृत्यु हो गई। एक बार भीखूऱाम जैन ने  इस लेखक को अपने राजपुर   वाले  घर  में बताया था कि उन्होंने अनीस अहमद को बार-बार भारत बुलाया ताकि डील को अंतिम रूप दिया जा सके। पर वे नहीं आए। 

ताजा सूरते हाल यह है कि 4 फ्लैग स्टाफ रोड के बंगले के स्वामित्व को लेकर विवाद जारी है। अब भीखूराम जैन, अनीस अहमद और लज्जाराम कपूर को गुजरे हुए भी एक जमाना हो गया। बहरहाल, 4 फ्लैग स्टाफ रोड  बंगले के मालिकाना हक के लिए आधी सदी से केस 

चल रहा है!  जैन सहाब के  बाद उनके पुत्र केस को लड रहे हैं  ! पर रुश्दी पर हुए हमले से आहत हैं.  कहते हैं, ये गलत हुआ है!

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